Adhura Irada. 20210821.
ये कैसी धिमी बातें
ये कैसा मधम इश्क़
बस इतनी हे दोस्ती
कितना खीचोगेह
तुम बीच सड़क ना भिगो सवान में
मैं घर के अन्दर भीगूं बिन बारिश
है साथ यहीं तक का
कया थमा हाथ चीर के लेजाओगेह
हां हो गई लापरवाहीं
रेह गया अधूरा इरादा
बस इतनी हे दोस्ती
छोड़ो अब कया काम ज्यादा
जो रात गई सो बात गई
अब ढल गए चांद सितारें
जब हर किसी को अपना सही
तो किसको कमज़ोर बताओगे
बस इतनी हे दोस्ती
कितना खीचोगेह
जो एक तरफ से छूटी
हाथ मसलते रह जाओगे